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दुनिया के ऐ मुसाफ़िर मंज़िल तेरी क़बर है / Duniya Ke Aye Musafir Manzil Teri Qabar Hai

दुनिया के ऐ मुसाफ़िर ! मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है जब से बनी है दुनिया लाखों-करोड़ों आए बाक़ी रहा न कोई, मिट्टी में सब समाए इस बात को न भूलो, सब का यही हशर है दुनिया के ऐ मुसाफ़िर ! मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है आँखों से तू ने अपनी देखे कई जनाज़े हाथों से तू ने अपने दफ़नाए कितने मुर्दे अंजाम से तू अपने क्यूँ इतना बे-ख़बर है दुनिया के ऐ मुसाफ़िर ! मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है ये 'आलिशान बंगले किसी काम के नहीं हैं महलों में सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं दो गज़ ज़मीं का टुकड़ा छोटा सा तेरा घर है दुनिया के ऐ मुसाफ़िर ! मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है मख़मल पे सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं शाह-ओ-गदा यहाँ पर सब एक हो रहे हैं दोनों हुए बराबर, ये मौत का असर है दुनिया के ऐ मुसाफ़िर ! मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है मिट्टी के पुतले ! तू ने मिट्टी में है समाना इक दिन यहाँ तू आया, इक दिन यहाँ से जाना रुकना नहीं यहाँ पर, जारी तेरा सफ़र है दुनिया के...

ऐ रसूल-ए-अमीं ख़ातम-उल-मुर्सलीं | तुझ सा कोई नहीं / Aye Rasool-e-Ameen Khatam-ul-Mursaleen | Tujh Sa Koi Nahin

ऐ रसूल-ए-अमीं, ख़ातम-उल-मुर्सलीं ! तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं है 'अक़ीदा ये अपना ब-सिद्क़-ओ-यक़ीं तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं दस्त-ए-क़ुदरत ने ऐसा बनाया तुझे जुम्ला औसाफ़ से ख़ुद सजाया तुझे ऐ अज़ल के हसीं ! ऐ अबद के हसीं ! तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं बज़्म-ए-कौनैन पहले सजाई गई फिर तेरी ज़ात मंज़र पे लाई गई सय्यिद-उल-अव्वलीं ! सय्यिद-उल-आख़िरीं ! तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं तेरा सिक्का रवाँ कुल जहाँ में हुआ इस ज़मीं में हुआ, आसमाँ में हुआ क्या 'अरब क्या 'अजम, सब हैं ज़ेर-ए-नगीं तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं तेरे अंदाज़ में वुस'अतें फ़र्श की तेरी परवाज़ में रिफ़'अतें 'अर्श की तेरे अन्फ़ास में ख़ुल्द की यासमीं तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं सिद्रतुल-मुंतहा रह-गुज़र में तेरी क़ाब-क़ौसैन गर्द-ए-सफ़र में तेरी तू है हक़ के क़रीं, हक़ है तेरे क़रीं तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं कहकशाँ ज़ौ तेरे सरमदी ताज की ज़ुल्फ़-ए-ताबाँ हसीं रात मे'राज की लैलतुल-क़द्र तेरी मुनव्वर जबीं तुझ सा कोई नहीं, तुझ सा कोई नहीं मुस्तफ़ा मुज्तबा ! तेरी मद्ह-ओ-सना मे...

मेरा दिल बदल दे | मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे / Mera Dil Badal De | Mera Gaflat Mein Dooba Dil Badal De

मेरा दिल बदल दे, मेरा दिल बदल दे मेरा दिल बदल दे, मेरा दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे हवा-ओ-हिर्स वाला दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे ख़ुदाया ! फ़ज़्ल फ़रमा, दिल बदल दे बदल दे दुनिया, दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे गुनहगारी में कब तक 'उम्र काटूँ बदल दे मेरा रस्ता, दिल बदल दे सुनूँ मैं नाम तेरा धड़कनों में मज़ा आ जाए, मौला ! दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे हटा लूँ आँख अपनी मा-सिवा से जियूँ मैं तेरी ख़ातिर, दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे करूँ क़ुर्बान अपनी सारी ख़ुशियाँ तू अपना ग़म 'अता कर, दिल बदल दे सहल फ़रमा मुसलसल याद अपनी ख़ुदाया ! रहम फ़रमा, दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे मेरा दिल बदल दे, मेरा दिल बदल दे मेरा दिल बदल दे, मेरा दिल बदल दे पड़ा हूँ तेरे दर पे दिल-शिकस्ता रहूँ क्यूँ दिल-शिकस्ता, दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे तेरा हो जाऊँ इतनी आरज़ू है बस इतनी है तमन्ना, दिल बदल दे मेरी फ़रियाद सुन ले, मेरे मौला ! बना ले अपना बंदा, दिल बदल दे मेरा ग़फ़लत में डूबा दिल बदल दे दिल-ए-मग़्मूम को मसरूर ...

वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला / Wo Nabiyon Mein Rehmat Laqab Pane Wala (All Versions)

वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला वो सर-चश्मा-ए-नूर-ए-फ़त्ह-ए-मुबीं है वोही मश'अल-ए-राह-ए-'अज़्म-ओ-यक़ीं है उसी से हमारे दिलों में उजाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला उसी के ये हम पर हैं एहसान सारे क़दम मंज़िलें चूमती हैं हमारे उसी ने अँधेरों से हम को निकाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला सहारा दिया उस के नक़्श-ए-क़दम ने उसी की तवज्जोह, उसी के करम ने ज़माने के गिरते हुओं को सँभाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला उसी की मोहब्बत है ईमान-ए-कामिल उसी से मिला हम को 'इरफ़ान-ए-मंज़िल उसी ने हमें जादा-ए-हक़ पे डाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला उसी से है इस्लाम का बोल-बाला ना'त-ख़्वाँ: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमी मुदस्सिर अब्दुल्लाह वो नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला मुरादें ग़रीबों की बर लाने वाला मुसीबत में ग...

इलाही तेरी चौखट पर भिकारी बन के आया हूँ / Ilahi Teri Chaukhat Par Bhikari Ban Ke Aaya Hoon | Ilahi Teri Chokhat Par Bhikari Ban Ke Aaya Hoon

इलाही ! तेरी चौखट पर भिकारी बन के आया हूँ सरापा फ़क़्र हूँ, 'इज्ज़-ओ-नदामत साथ लाया हूँ भिकारी वो कि जिस के पास झोली है न प्याला है भिकारी वो जिसे हिर्स-ओ-हवस ने मार डाला है मता'-ए-दीन-ओ-दानिश नफ़्स के हाथों से लुटवा कर सुकून-ए-क़ल्ब की दौलत हवस की भेट चढ़वा कर लुटा कर सारी पूँजी ग़फ़लत-ओ-'इस्याँ के दलदल में सहारा लेने आया हूँ तेरे का'बे के आँचल में गुनाहों की लिपट से काइनात-ए-क़ल्ब अफ़सुर्दा इरादे मुज़्महिल, हिम्मत शिकस्ता, हौसले मुर्दा कहाँ से लाऊँ ताक़त दिल की सच्ची तर्जुमानी की कि किस जंजाल में गुज़री हैं घड़ियाँ ज़िंदगानी की ख़ुलासा ये कि बस जल भुन के अपनी रू-सियाही से सरापा फ़क़्र बन कर अपनी हालत की तबाही से तेरे दरबार में लाया हूँ अपनी अब ज़बूँ-हाली तेरी चौखट के लाइक़ हर 'अमल से हाथ हैं ख़ाली ये तेरा घर है, तेरे मेहर का दरबार है, मौला ! सरापा नूर है इक महबत-ए-अनवार है, मौला ! तेरी चौखट के जो आदाब हैं मैं उन से ख़ाली हूँ नहीं जिस को सलीक़ा माँगने का वो सवाली हूँ ज़ुबाँ ग़र्क़-ए-नदामत दिल की नाक़िस तर्जुमानी पर ख़ुदाया ! रहम मेरी इस ज़बान-ए-बे-ज़बानी पर ये आँखें ख़ुश्क...

मैं तो उम्मती हूँ, ए शाह-ए-उमम ! / Main To Ummati Hun, Ai Shaah-e-Umam !

मैं तो उम्मती हूँ, ए शाह-ए-उमम ! कर दे मेरे आक़ा ! अब नज़र-ए-करम मैं तो बे-सहारा हूँ, दामन भी है ख़ाली नबियों के नबी ! तेरी शान है निराली मैं तो उम्मती हूँ, ए शाह-ए-उमम ! कर दे मेरे आक़ा ! अब नज़र-ए-करम ग़म के अँधेरों ने यूँ गेरा हुवा है आक़ा ! दुश्वार अब जीना मेरा हुवा है बिगड़ी बना दो मेरी, तयबा के वाली ! नबियों के नबी ! तेरी शान है निराली मैं तो उम्मती हूँ, ए शाह-ए-उमम ! कर दे मेरे आक़ा ! अब नज़र-ए-करम जिस को बुलाया गया, वो ही अर्श-ए-बरीं है आप के सिवा ऐसा कोई नहीं है जिस की न बात कोई रब ने भी टाली नबियों के नबी ! तेरी शान है निराली मैं तो उम्मती हूँ, ए शाह-ए-उमम ! कर दे मेरे आक़ा ! अब नज़र-ए-करम नात-ख़्वाँ: जुनैद जमशेद main to ummati hoon aye shahe umam lyrics in hindi,main to ummati hoon ay shah e umam lyrics in Hindi,shaah e umam, lyrics of naat, naat lyrics in hindi, islamic lyrics, hindi me naat lyrics, hindi me naat likhi hui,